नए मॉडलिंग से संकेत मिलता है कि ग्रीनलैंड की बर्फ की चादर से निकलने वाला पिघला हुआ पानी महत्वपूर्ण अटलांटिक धाराओं को काफी कमजोर कर रहा है, विशेष रूप से अटलांटिक मरिडियनल ओवरटर्निंग सर्कुलेशन (AMOC)। हालांकि, शोधकर्ताओं का मानना है कि इन धाराओं का पूर्ण और अपरिवर्तनीय पतन होने की संभावना नहीं है।
लाइव साइंस द्वारा रिपोर्ट किए गए अध्ययन में, ग्रीनलैंड से ताज़े पानी के बढ़ते प्रवाह के प्रभाव पर ध्यान केंद्रित किया गया है जो तेजी से बर्फ पिघलने के कारण होता है। कम घनीभूत जल का यह प्रवाह AMOC को बाधित करता है, जो गर्म सतह के पानी को उत्तर की ओर ले जाकर और ठंडे गहरे पानी को दक्षिण की ओर लौटाकर वैश्विक जलवायु पैटर्न को विनियमित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस परिसंचरण के कमजोर होने से यूरोप और उत्तरी अमेरिका में मौसम प्रणालियों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।
मॉडलिंग से पता चलता है कि जबकि AMOC “मजबूत कमजोरी” का अनुभव करेगा, लेकिन इसके पूरी तरह से बंद होने की उम्मीद नहीं है। शोधकर्ताओं ने ग्रीनलैंड के पिघले हुए पानी के महासागर की लवणता और घनत्व पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण करने वाले उन्नत सिमुलेशन के माध्यम से यह निर्धारित किया। स्रोत यह निर्दिष्ट नहीं करता है कि ये परिवर्तन *कब* अपेक्षित हैं, केवल इतना ही कि वे चल रही बर्फ की चादर के पिघलने से जुड़े हैं।
अनुसंधान टीम के निष्कर्ष ग्रीनलैंड के प्रवाह से एक महत्वपूर्ण प्रभाव का संकेत देते हैं, लेकिन विनाशकारी विफलता की भविष्यवाणी करने से रोकते हैं। लाइव साइंस के अनुसार, अध्ययन में निष्कर्ष निकाला गया है कि पिघला हुआ पानी इन महत्वपूर्ण अटलांटिक धाराओं की “मजबूत कमजोरी, लेकिन बंद नहीं” करेगा।
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